उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद अंतर्गत शहाबगंज थाना क्षेत्र के विशुनपुरा गांव स्थित भारत माला परियोजना के प्लांट परिसर में हाईवा चालक अशोक कुमार पाण्डेय की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद की शिकायत पर मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी चंदौली से जवाब तलब किया है तथा एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया है। साथ ही आयोग ने शिकायतकर्ता खालिद वकार आबिद को भी जांच समिति में सम्मिलित किए जाने का आदेश पारित किया है।
ज्ञात हो कि 07 जनवरी 2026 (बुधवार) की सुबह भारत माला परियोजना के प्लांट परिसर स्थित शौचालय के अंदर एक 35 वर्षीय हाईवा चालक अशोक कुमार पाण्डेय, निवासी ग्राम घुरघाट, जनपद सिवान (बिहार) का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। मृतक भारत माला परियोजना में हाईवा चालक के पद पर कार्यरत था।बताया गया कि जब बुधवार की सुबह अशोक कुमार पाण्डेय अपने सहकर्मियों को दिखाई नहीं दिया तो उसकी तलाश शुरू की गई। खोजबीन के दौरान प्लांट परिसर स्थित शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद पाया गया। इसकी सूचना तत्काल शहाबगंज थाना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां मृतक का शव फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी एवं फॉरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य संकलित किए गए।मामले को लेकर अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद ने कहा कि यह घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। एक प्रवासी श्रमिक, जो एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना में कार्यरत था, उसकी मृत्यु कार्यस्थल परिसर के भीतर होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसे मामलों में केवल आत्महत्या मान लेना न्यायसंगत नहीं है। मृतक की कार्य परिस्थितियां, मानसिक दबाव, ठेकेदार अथवा परियोजना प्रबंधन की भूमिका, मजदूरी से जुड़े विवाद, सुरक्षा मानकों के पालन तथा संभावित मानवाधिकार उल्लंघन जैसे सभी पहलुओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।उन्होंने यह भी कहा कि मृतक अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। उसकी आकस्मिक मृत्यु से उसका परिवार गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट में आ गया है, जो सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं गरिमा के अधिकार से जुड़ा विषय है।इस गंभीर मामले को लेकर अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने 12 जनवरी 2026 को राज्य मानवाधिकार आयोग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने—घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने,भारत माला परियोजना से जुड़े ठेकेदार, कंपनी प्रबंधन एवं जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच,मानवाधिकार या श्रम कानूनों के उल्लंघन की स्थिति में दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई,मृतक अशोक कुमार पाण्डेय के परिजनों को शीघ्र एवं सम्मानजनक मुआवजा दिलाए जाने,तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु श्रमिकों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करनेकी मांग की थी।शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने 13 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया। आयोग ने जिलाधिकारी, चंदौली को निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता को जांच प्रक्रिया में सम्मिलित करते हुए मामले की विस्तृत रिपोर्ट 05 मार्च 2026 तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 06 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।यह मामला अब केवल एक श्रमिक की मृत्यु तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा, अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार मुद्दा बन गया है।