चंदौली

मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद की शिकायत पर आयोग सख्त

चंदौली

चंदौली जनपद के कंदवा थाना क्षेत्र के अदसड़ गांव के समीप ड्यूटी के दौरान 23 वर्षीय संविदा लाइनमैन सरदुम बिंद की हाईटेंशन करंट लगने से हुई मौत के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद की लिखित शिकायत पर की गई है।घटना 14 फरवरी की है। सरदुम बिंद स्वतंत्र फीडर पर संविदा लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। वह शटडाउन लेकर हाईटेंशन पोल पर जंपर जोड़ने के लिए चढ़े थे। आरोप है कि संबंधित लाइन के बजाय दूसरी लाइन पर शटडाउन दिया गया, जबकि जिस लाइन पर कार्य हो रहा था, उसमें करंट प्रवाहित था। अचानक करंट लगने से वह पोल से नीचे गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।घटना के बाद आक्रोशित संविदा कर्मियों ने लगभग 100 से 130 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप कर धरना प्रदर्शन किया। विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए संबंधित जेई को निलंबित कर दिया है, जबकि एसडीओ के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ और शटडाउन प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि बरती गई। साथ ही यह भी प्रश्न उठाया गया है कि संविदा कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने 17 फरवरी 2026 को आदेश पारित करते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक,वाराणसी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रकरण की आवश्यक जांच कर शिकायतकर्ता को सम्मिलित करते हुए रिपोर्ट 20 अप्रैल 2026 तक आयोग को भेजी जाए। मामले को 21 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शिकायतकर्ता खालिद वकार आबिद ने मांग की है कि घटना की स्वतंत्र मजिस्ट्रियल जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण केवल एक संविदा कर्मी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा और उनके जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है।